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डॉ भीमराव अंबेडकर

  STUDY NOVELTY  डॉ. भीमराव अंबेडकर : सामाजिक–धार्मिक विमर्श, आर्थिक चिंतन और आधुनिक भारत का वैचारिक शिल्पकार डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर आधुनिक भारत के उन महानतम बुद्धिजीवियों में से एक थे जिनकी चिंतन-परंपरा समाज, राजनीति, अर्थशास्त्र, धर्म और इतिहास के विविध क्षेत्रों को एक साथ छूती है। उनका जीवन संघर्ष, अध्ययन, सामाजिक प्रश्नों की गहरी समझ और मानवता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का संगम था। अंबेडकर की बौद्धिक यात्रा केवल दलित समाज के उद्धार का प्रयास नहीं थी; वह पूरे राष्ट्र के पुनर्निर्माण की वैचारिक परियोजना थी। उनकी कृतियाँ उनके चिंतन का व्यापक स्वरूप प्रस्तुत करती हैं और आधुनिक भारत के निर्माण में उनका निर्णायक योगदान स्पष्ट करती हैं। डॉ अंबेडकर की प्रमुख कृतियां हैं : Waiting for a Visa The Annihilation of Caste Riddle of the Shudras Riddles in Hinduism The Problem of the Rupee Pakistan or the Partition of India सामाजिक पृष्ठभूमि और व्यक्तित्व का निर्माण अंबेडकर का जन्म ऐसे समाज में हुआ जहाँ उन्हें अछूत होने के कारण भेदभाव और अपमान का सामना करना पड़ा। बचपन में स्कूल में अलग ब...
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अभिनेता धर्मेंद्र

  धर्मेंद्र : एक सपना, एक संघर्ष, एक अमर मुस्कान गाँव की मिट्टी से सपनों की उड़ान तक पंजाब के साहनेवाल कस्बे में जन्मे धर्मेंद्र का बचपन बिल्कुल साधारण था—खेतों की खुशबू, मिट्टी की सौंधी ऊर्जा और परिवार की उम्मीदें। उन्हें अपने गाँव से बेहद प्रेम था, और यही प्रेम उनकी आत्मा का आधार बना। उनकी आँखों में एक सपना था—“पर्दे पर चमकना”—पर इतना बड़ा सपना किसी छोटे कस्बे में खुलकर सपने जैसा ही लगता था। पर कवि हरिवंश राय बच्चन ने कहा है न कि “हर बड़ा सपना अक्सर छोटी जगहों की खामोशी में जन्म लेता है, और किसी बड़ी जगह पर साकार रूप लेता है।” बस इसी तरह से धर्मेंद्र की कहानी शुरू होती और आकार लेती है। चुनौतियों की राह पर पहला कदम गाँव से मुंबई की यात्रा आसान नहीं थी। जेब में थोड़े पैसे, दिल में हज़ार उम्मीदें और मन में यह विश्वास कि “कुछ बनकर ही लौटूँगा।” मुंबई जैसे विशाल शहर में संघर्ष उनकी परीक्षा था। कई दफ़ा स्टूडियो के बाहर घंटों इंतज़ार—कभी अवसर नहीं, कभी पहचान नहीं। लेकिन धर्मेंद्र हार नहीं माने। उनके भीतर का हीरो पहले मन में पैदा हुआ, और फिर वह पर्दे पर उभरा। इस बात पर मिर्ज़ा  ग़ालि...

महात्मा गांधी

             महात्मा गांधी Written by AMBUJ SIINGH  www.studynovelty.com भूमिका महात्मा गांधी, जिन्हें विश्व “महात्मा” (रविंद्रनाथ टैगोर द्वारा चंपारण सत्याग्रह की सफलता पर गांधीजी को दी गई उपाधि) अर्थात् “महान आत्मा” के नाम से जानता है, केवल भारत के नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए एक नैतिक और आध्यात्मिक प्रकाशपुंज रहे। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कहा था, “गांधीजी केवल एक राजनैतिक नेता नहीं, बल्कि एक ऐसी आत्मा हैं जो सत्य और अहिंसा के मार्ग से मानवता को दिशा दे रही है, इसलिए वे महात्मा हैं।” उन्होंने सत्य, अहिंसा, प्रेम और करुणा के सिद्धांतों पर आधारित जीवन जिया और मानव सभ्यता को एक नई दिशा दी। उनका जीवन दर्शन केवल एक राजनैतिक आंदोलन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह नैतिक पुनर्जागरण का प्रतीक था। उन्होंने यह सिद्ध कर दिखाया कि सत्य और अहिंसा जैसे नैतिक आदर्श भी राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन ला सकते हैं। गांधीजी के जीवन और विचारों का प्रभाव आज भी विश्व के कोने-कोने में महसूस किया जाता है। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात...

भगत सिंह की जयंती/28 सितंबर

  शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती (28 सितंबर ) Written by AMBUJ SIINGH  www.studynovelty.com भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को हुआ था। उनके पिता का नाम किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था। उनके चाचा मशहूर क्रांतिकारी नेता अजीत सिंह थे। उनके बचपन का नाम भगत लाल था। नेशनल कॉलेज लाहौर से उनकी पढ़ाई हुई थी। उन्हें हिंदी, उर्दू, पंजाबी के अलावा अंग्रेजी और संस्कृत भाषा का भी अच्छा ज्ञान था। भगत सिंह अपने क्रांतिकारी चाचा अजीत सिंह से प्रेरित थे। 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड का भी उनके बाल मन पर काफी गहरा असर पड़ा था। 4 फरवरी 1922 को हुई चौरीचौरा घटना के बाद जब गांधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया, तो भारत में पुनः एक बार क्रांतिकारी गतिविधियों शुरू हो गईं और यहीं से शुरू हुआ भगत सिंह का क्रांतिकारी सफर। किंतु 1924 के दौरान भगत सिंह को अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेता देख उनके परिवार ने इन पर विवाह करने के लिए परिवार का दबाव डालना शुरू कर दिया। ऐसे में भगत सिंह ने घर छोड़ दिया और कानपुर आ गए। उस समय कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी का स...

25 सितंबर/पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती/अंत्योदय दिवस

पंडित दीनदयाल उपाध्याय Written by AMBUJ SIINGH   www.studynovelty.com प्रारंभिक जीवन और शिक्षा दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को धनकिया नामक स्थान पर जयपुर अजमेर रेलवे लाइन के पास (राजस्थान) हुआ था। नागला चंद्रभान (मथुरा) दीनदयाल जी का पैतृक गांव था। इनके पिता भगवती प्रसाद उपाध्याय सहायक स्टेशन मास्टर थे और माता रामप्यारी एक धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। बचपन में ही माता-पिता का देहांत हो जाने के कारण उनका पालन-पोषण नाना-नानी और चाचा ने किया। प्रारंभिक शिक्षा गंगा मध्य विद्यालय, सिकंदरा में हुई। बाद में उन्होंने पिलानी के बिरला कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। इसके बाद कानपुर से स्नातक और आगरा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव दीनदयाल उपाध्याय विद्यार्थी जीवन में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए। उनका व्यक्तित्व सरल, ईमानदार और सेवाभावी था, जिससे वे शीघ्र ही प्रचारक के रूप में संघ के प्रमुख कार्यकर्ताओं में गिने जाने लगे। वे जनसंघ और संघ के सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय रूप से योगदान देने...

29 अगस्त/राष्ट्रीय खेल दिवस/मेजर ध्यानचंद की जयंती

            मेजर ध्यानचंद : हॉकी के जादूगर By AMBUJ KUMAR SINGH  www.studynovelty.com ना शोहरत का नशा, ना दौलत का अभिमान, खेल को ही समझा उन्होंने सबसे बड़ा सम्मान। स्टिक के जादूगर, मैदान के बादशाह, फिर भी सादगी से भरी था उनकी हर एक राह। ये चार पंक्तियां भारतीय खेल जगत के एक ऐसे खिलाड़ी की ओर संकेत करती हैं, जिसका नाम खेल इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है। जी हां, हम बात कर रहे हैं मेजर ध्यानचंद की, जिन्हें पूरी दुनिया 'हॉकी का जादूगर' कहकर याद करती है। हॉकी की बॉल उनके स्टिक से इस प्रकार चलती थी, मानो वह स्टिक से चिपक गई हो। जर्मनी के तानाशाह हिटलर से लेकर विश्व के अनेक बड़े खिलाड़ी और नेता उनकी प्रतिभा के कायल थे। ध्यानचंद न केवल भारत के लिए तीन ओलंपिक स्वर्ण पदक लेकर आए, बल्कि उन्होंने खेल को भारतीय आत्मा और गौरव का प्रतीक बना दिया। प्रारंभिक जीवन और छात्र अवस्था ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ। उनके पिता समेश्वर सिंह स्वयं ब्रिटिश भारतीय सेना में सिपाही थे और हॉकी खेलते थे। पिता से ही ध्यानचंद को हॉकी का सं...

सद्भावना दिवस/राजीव गांधी का जन्म दिवस (20 अगस्त)

सद्भावना दिवस/राजीव गांधी का जन्म दिवस (20 अगस्त) By AMBUJ KUMAR SINGH  www.studynovelty.com पारिवारिक पृष्ठभूमि   राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944, मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) में हुआ था। उनके पिता फिरोज गांधी प्रसिद्ध संसदीय नेता और पत्रकार थे। उनकी माता इंदिरा गांधी थीं, जो बाद में भारत की प्रधानमंत्री बनीं। उनके दादा पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे। इस प्रकार राजीव गांधी ऐसे परिवार से थे, जो भारतीय राजनीति के केंद्र में रहा। पर उससे भी महत्वपूर्ण बात यह थी कि अपने युवावस्था के प्रारंभिक दिनों में वह इस राजनीतिक चकाचौंध से बेहद दूर अपनी तकनीकी दुनिया में ही खुश और संतुष्ट थे। राजनीति में उनका प्रवेश तत्कालीन परिस्थितियों के कारण हुआ था। राजीव गांधी की शिक्षा-दीक्षा राजीव गांधी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शिव निकेतन स्कूल, देहरादून से प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने आगे की शिक्षा भारत के प्रतिष्ठित लड़कों के बोर्डिंग स्कूल दून स्कूल, देहरादून (भारत का ईटन कॉलेज के नाम से चर्चित) जहाँ बाद में उनके छोटे भाई संजय गांधी भी पढ़े। उच्च शिक्षा हेतु कैम्ब्रिज विश्वविद...