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भाग 4 (नीति निदेशक तत्व) - 17/07/2021

  STUDY NOVELTY By: Ambuj Kumar Singh नीति निदेशक तत्व - 17/07/2021 नीति निदेशक तत्व (भाग - 4) ★ ग्रेनविल आस्टिन ने भारतीय संविधान को मूलतः एक 'सामाजिक प्रलेख' मानते हुए यह स्वीकार किया है, कि इसके अधिकांश प्रावधान सामाजिक क्रांति के लक्ष्यों को बढ़ावा देते हैं, या इससे संबंधित आवश्यक परिस्थितियों का निर्माण करते हैं। इस सामाजिक क्रांति का लक्ष्य मूल अधिकार तथा नीति निदेशक तत्व में निहित दिखाई देता है। ★ राज्य की नीति के निदेशक तत्व संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 36 से 51 तक उल्लिखित हैं, जो आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं। ★ मूल अधिकार वाद योग्य हैं, जबकि नीति निदेशक तत्व वाद योग्य नहीं हैं, अर्थात इन्हें प्रवर्तित कराने के लिए न्यायालय की शरण नहीं ली जा सकती है। ★ नीति निदेशक तत्व राज्य के नैतिक कर्तव्य हैं, जो कल्याणकारी राज्य की संकल्पना तथा सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना पर बल देते हैं। अनु. 36 - राज्य की परिभाषा (भाग-3 जैसी)। अनु. 37 - इस भाग में अंतर्विष्ट तत्वों का लागू होना - - ये न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं होंगे।  - देश के शासन में मूलभूत हैं।  - इन तत्वो...