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भारत में पंथनिरपेक्षता | Secularism in India

  STUDY NOVELTY By: Ambuj Kumar Singh 'भारत में पंथनिरपेक्षता' Secularism in India 20/05/2021      42 वें संविधान संशोधन , 1976 के द्वारा भारत के संविधान की उद्देशिका में 'पंथनिरपेक्ष' शब्द जोड़कर भारत को एक पंथनिरपेक्ष राज्य घोषित किया गया है । किंतु केशवानंद भारती (1973) और एस आर बोम्मई वाद (1994) से पता चलता है कि मूल अधिकारों में वर्णित अनुच्छेदों से भी पंथनिरपेक्षता भारतीय संविधान के आधारभूत लक्षण  के रूप में स्पष्ट होता है । 'पंथनिरपेक्षता' अंग्रेजी शब्द 'सेक्युलरिज्म' , जो मूलतः लैटिन शब्द 'सेक्युलम' से बना है , का हिन्दी अनुवाद है , जिसका अर्थ है - इहलोक से संबंधित । वस्तुतः यह यूरोप से आयातित शब्द है । यूरोप में मध्यकाल में धर्म (पंथ) का राजनीति में व्यापक हस्तक्षेप था । राज्य को एक दैवी संस्था माना गया था , और चर्च को इस संस्था का प्रतिनिधि । धर्म सुधार आंदोलनों के बाद यूरोप में सम्प्रभु राज्य की स्थापना हुई , तब विभिन्न विचारकों ने पूछा कि राज्य धर्म या चर्च से क्यों आदेशित हो ? ऐसे में दोनों के अलगाव पर बल दिया गया । इसी ने पंथनिरपे...