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कृत्रिम मेधा Artificial Intelligence

  कृत्रिम मेधा : तकनीकी प्रगति और मानवीय विवेक के मध्य संतुलन ​ ​21वीं सदी के वैचारिक और तकनीकी परिदृश्य में कृत्रिम मेधा (Artificial Intelligence - AI) एक ऐसी धुरी बनकर उभरी है, जिसने मानव सभ्यता के समक्ष संभावनाओं और चुनौतियों का एक नया क्षितिज खोल दिया है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो भाप के इंजन से लेकर इंटरनेट के उद्भव तक, प्रत्येक औद्योगिक क्रांति ने मानव श्रम और उत्पादकता को पुनर्परिभाषित किया है। परंतु, वर्तमान 'चौथी औद्योगिक क्रांति' का मुख्य आधार यानी AI, केवल शारीरिक श्रम का विकल्प नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर मनुष्य की सबसे अनूठी विशेषता - 'सोचने और निर्णय लेने की क्षमता' - को प्रभावित और प्रतिस्थापित करने का प्रयास कर रही है। औद्योगिक क्रांति के प्रथम चरण में भाप और पानी की शक्ति के माध्यम से उत्पादन का मशीनीकरण हुआ। इसके द्वितीय चरण में बिजली के आविष्कार और असेंबली लाइन के जरिए बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हुआ। इसके तृतीय चरण को 'डिजिटल क्रांति' भी कहा जाता है, जिसमें कंप्यूटर, इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक्स का उदय हुआ। इसका चौथा चरण 'इंटेलिजें...