कृत्रिम मेधा : तकनीकी प्रगति और मानवीय विवेक के मध्य संतुलन 21वीं सदी के वैचारिक और तकनीकी परिदृश्य में कृत्रिम मेधा (Artificial Intelligence - AI) एक ऐसी धुरी बनकर उभरी है, जिसने मानव सभ्यता के समक्ष संभावनाओं और चुनौतियों का एक नया क्षितिज खोल दिया है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो भाप के इंजन से लेकर इंटरनेट के उद्भव तक, प्रत्येक औद्योगिक क्रांति ने मानव श्रम और उत्पादकता को पुनर्परिभाषित किया है। परंतु, वर्तमान 'चौथी औद्योगिक क्रांति' का मुख्य आधार यानी AI, केवल शारीरिक श्रम का विकल्प नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर मनुष्य की सबसे अनूठी विशेषता - 'सोचने और निर्णय लेने की क्षमता' - को प्रभावित और प्रतिस्थापित करने का प्रयास कर रही है। आज शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, न्यायपालिका, राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में AI का प्रभाव सर्वव्यापी हो चुका है। भारत सरकार का 'IndiaAI Mission' इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्र अपनी विकासात्मक आकांक्षाओं को गति देने के लिए इस तकनीक को अपनाने के लिए पूरी तरह तत्पर है। इसके साथ ही, यूनेस्को (UNESCO) और ओईसीडी (OECD...
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