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संविधान (उद्देशिका, संघ और राज्यक्षेत्र तथा नागरिकता) - 14/07/2021

 

STUDY NOVELTY

By: Ambuj Kumar Singh


संविधान - 14/07/2021

   समितियां                             अध्यक्ष                 संचालन समिति                   राजेंद्र प्रसाद                प्रारूप समिति                     भीमराव अंबेडकर
संघ संविधान समिति            जवाहरलाल नेहरू
प्रांतीय संविधान समिति        वल्लभ भाई पटेल
अस्थाई झंडा समिति            राजेंद्र प्रसाद
स्थाई झंडा समिति               जे बी कृपलानी
अल्पसंख्यक परामर्श            वल्लभ भाई पटेल
समिति     
मूल अधिकार समिति            वल्लभ भाई पटेल
देसी रियासत समझौता         जवाहरलाल नेहरू
वार्ता समिति



                संविधान के स्रोत


ब्रिटेन :- संसदीय व्यवस्था, संसदीय विशेषाधिकार, एकल नागरिकता, विधि निर्माण की प्रक्रिया।

अमेरिका :- मौलिक अधिकार, संविधान की सर्वोच्चता, न्यायिक पुनर्विलोकन, महाभियोग की प्रक्रिया, वित्तीय आपात, उपराष्ट्रपति का पद।

कनाडा :- अर्ध संघात्मक सरकार व अवशिष्ट शक्तियां ।

आयरलैंड :- नीति निदेशक तत्व, राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल, राज्यसभा में मनोनयन, आपातकाल।

ऑस्ट्रेलिया :- समवर्ती सूची, शक्तियों का विभाजन एवं प्रस्तावना।

दक्षिण अफ्रीका :- संविधान संशोधन की प्रक्रिया।

रूस :- मौलिक कर्तव्य।

जर्मनी :- आपातकाल में राष्ट्रपति की शक्तियां।


                

           उद्देशिका/प्रस्तावना


हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए,

तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,

विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, 

प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, 

तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए,

दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 ईस्वी (मिति मार्गशीर्ष शुक्ला सप्तमी, संवत दो हजार छ: विक्रमी) को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।


★ उद्देशिका को संविधान की आत्मा माना जाता है। किंतु डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने 'संवैधानिक उपचारों के अधिकार' (अनुच्छेद 32) को संविधान की आत्मा माना है।

★ बेरुबारी वाद (1960) में उद्देशिका को संविधान का अंग नहीं माना गया था। किंतु यह स्वीकार किया गया था की उद्देशिका संविधान निर्माताओं के विचारों को जानने की कुंजी है संविधान की संदिग्ध एवं  अस्पष्ट भाषा वाली जगह पर उद्देशिका की सहायता ली जा सकती है।

★ गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य वाद (1967) में उद्देशिका को संविधान की मूल आत्मा कहा गया था।

★ केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य वाद (1973) में उद्देशिका को संविधान का अंग मानते हुए यह स्वीकार किया गया कि उसमें संशोधन किया जा सकता है, किंतु मूल ढांचे को नष्ट नहीं किया जा सकता है।

★ 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के द्वारा उद्देशिका में संशोधन करके उसमें समाजवादी, पंथनिरपेक्ष तथा अखंडता 3 शब्द जोड़े गए थे।

★ उद्देशिका को न्यायालय में प्रवर्तित नहीं किया जा सकता है।

★ उद्देशिका से हमें सत्ता के स्रोत (भारत की जनता), राज्य एवं सरकार के स्वरूप (संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य), शासन व्यवस्था के लक्ष्य (समता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व) तथा संविधान को स्वीकार करने तथा आंशिक रूप से लागू करने की तिथि का पता चलता है।


             संविधान

        भाग - 1 ( संघ और उसका राज्यक्षेत्र)


अनु. 1 - संघ का नाम (इंडिया/भारत) एवं राज्य क्षेत्र।
अनु. 2 - नए राज्यों (विदेशी) का प्रवेश या स्थापना।
अनु. 3 - नए राज्यों का निर्माण एवं वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन।
अनु. 4 - अनुच्छेद 2 एवं 3 के तहत संसद द्वारा पारित कोई भी विधेयक अनुच्छेद 368 के अधीन संविधान संशोधन नहीं माना जाएगा।

★ वर्तमान में भारत में 28 राज्य तथा 8 केंद्रशासित प्रदेश हैं।

★ आंध्र प्रदेश भाषाई आधार पर गठित होने वाला भारत का पहला राज्य है।



                    भाग - 2 (नागरिकता)


अनु. 5 - संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता।
अनु. 6 - पाकिस्तान से भारत को प्रव्रजन करने वाले व्यक्तियों के नागरिकता संबंधी अधिकार।
अनु. 7 - पाकिस्तान को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार।
अनु. 8 - भारत के बाहर रहने वाले भारतीय उद्भव के कुछ व्यक्तियों की नागरिकता के अधिकार।
अनु. 9 - विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित करने वाले व्यक्तियों की नागरिकता की समाप्ति।
अनु. 10 - नागरिकता के अधिकार का बने रहना।
अनु. 11 - संसद द्वारा नागरिकता के अधिकार का विधि द्वारा नियमन।


नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार, भारत की नागरिकता प्राप्त करने के आधार -
1. जन्म से।
2. वंश परंपरा से।
3. पंजीकरण द्वारा।
4. देशीकरण द्वारा।
5. भूमि विस्तार द्वारा।


नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 के अनुसार, नागरिकता की समाप्ति के आधार -
1. स्वेच्छा से परित्याग।
2. विदेशी राज्य की नागरिकता ग्रहण करने पर।
3. भारत सरकार द्वारा नागरिकता से वंचित किया जाना (आधार) -
(क) भारतीय संविधान के प्रति अनादर प्रकट करने पर।
(ख) युद्ध के दौरान शत्रु का सहयोग करने पर।
(ग)  लगातार 7 वर्ष भारत से बाहर रहने पर।
(घ)  फर्जी तरीके से नागरिकता प्राप्त करने पर।
(ङ) पंजीकरण या देशीकरण द्वारा प्राप्त नागरिकता के 5 वर्ष के भीतर किसी अन्य देश द्वारा 2 वर्ष की सजा पाने पर।

★ 10 जनवरी 1920 से लागू नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 अफगानिस्तान पाकिस्तान तथा बांग्लादेश के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी तथा ईसाई धर्म के प्रवासियों को, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश किया है, नागरिकता देने का प्रावधान करता है। इसमें नागरिकता हेतु एक 11 वर्ष की समयावधि को घटाकर 6 वर्ष कर दिया गया है।







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